Saturday, 11 August 2012
Thursday, 9 August 2012
Wednesday, 8 August 2012
Ghazal
फ़ैसला तुम को भूल जाने का
इक नया ख्वाब है दीवाने का
दिल कली का लरज़ लरज़ उठा
जिक्र था फिर बहार आने का
हौसला कम किसी में होता है
जीत कर खुद ही हार जाने का
जिंदगी कट गई मनाते हुए
अब इरादा है रूठ जाने का
आप शहज़ाद की ना फिक्र करें
वो तो आदी है ज़ख़्म खाने का
Tuesday, 7 August 2012
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