Wednesday, 8 August 2012



Azka

AZKA NORAIN



Ghazal



फ़ैसला तुम को भूल जाने का
इक नया ख्वाब है दीवाने का

दिल कली का लरज़ लरज़ उठा
जिक्र था फिर बहार आने का

हौसला कम किसी में होता है
जीत कर खुद ही हार जाने का

जिंदगी कट गई मनाते हुए
अब इरादा है रूठ जाने का

आप शहज़ाद की  ना फिक्र करें
वो तो आदी है ज़ख़्म खाने का

Tuesday, 7 August 2012